Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अत्रैवोदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् ।
किरातेशस्य सुरघोर्वृत्तान्तं विस्मयास्पदम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
)
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, पहले के मुनि इसी विषय में यानी शब्दरूपा भेददृष्टि केवल बोध
के लिए है, इस कहे गये अर्थ में ही प्राचीन इतिहास का, जिसमें भीलों के राजा सुरघु का अत्यन्त विस्मय
करानेवाला वृत्तान्त है, उदाहरण देते हैं
सर्ग सन्दर्भ
सत्तावनवाँ सर्ग समाप्त अद्भावनर्वं सर्ग किरात देश के सुरघु के वैराम्य का वर्णन तथा उसके प्रति मांडव्य का उपदेश ।