Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
स चक्रे राजकार्याणि निग्रहानुग्रहक्रमैः ।
यथाप्राप्तान्यखिन्नाङ्गो दिनानीव दिवाकरः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जेस सहस्रांशु
दिवाकर (सूर्य) किसी प्रकार की अंगों में थकावट का अनुभव किये बिना क्रमशः एक के पीछे एक अनेक
दिवसों का निर्माण करते हैं, ठीक उसी तरह वह सुरघु नाम का राजा अंगों मे किसी प्रकार की थकावट
का अनुभव किये बिना जिस समय जो राजकार्य प्राप्त होते गये, उनको निग्रह ओर अनुग्रह की व्यवस्था
से करता था