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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

अथवा निग्रहं प्राप्तं करोम्येतेन वै विना । वर्तते न प्रजैवेयं विना वारि सरिद्यथा ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

अब दूसरी कोटि बतलाते हैं। अथवा धर्मशास्त्र ने जिस पुरुष के लिए जैसा निग्रह यानी वध, बन्धन आदि दण्ड योग्य ठहराया हो, उसे वैसे ही दण्ड दूँ, क्योंकि बिना दण्ड दिये यह प्रजा अपनी-अपनी मर्यादा में ऐसे प्रवृत्त नहीं होती, जैसे कि जलके बिना नदी प्रवृत्त नहीं होती