Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
अथैकदा गृहं तस्य माण्डव्यो मुनिराययौ ।
भ्रान्ताशेषककुप्कुञ्जो वासवस्यव नारदः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी एक
समय जैसे देवर्षि नारद इन्द्र के घर आते हैं वैसे ही जिन्होंने समस्त दिशारूपी मण्डलों में भ्रमण किया
है, ऐसे महर्षि माण्डव्य उस राजा के घर पर आये