Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
सुरघुरुवाच ।
भवदागमनेनास्मि मुने निर्वृतिमागतः ।
परमां वसुधापीठं संप्राप्त इव माधवे ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
सुरघुने कहा : हे महामुने, जैसे भूमि पर वसन्त ऋतु के अथवा विष्णु के आने पर लोक
परम सुखी होते हैं, वैसे ही आपके शुभागमन से मैं अत्यन्त सुखी हुआ