Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अद्य तिष्ठाम्यहं नाथ धन्यानां धुरि धर्मतः ।
विकासि रविणेवाब्जं यत्त्वयास्म्यवलोकितः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवान्, आज मैंने
पुण्यवान् जनों में धर्मतः प्रथम स्थान प्राप्त किया, क्योंकि कमल को विकसित करनेवाले सूर्य के समान
आपने मेरे ऊपर कृपादृष्टि की है