Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
भगवन्सर्वधर्मज्ञ चिरं विश्रान्तवानसि ।
तदमुं संशयं छिन्धि ममार्कस्तिमिरं यथा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण धर्मों के जाननेवाले हे भगवान्, आप परम पद में
चिरकाल से ही विश्रान्ति पा चुके हैं, अत: जैसे सूर्य अन्धकार को काट डालता है, वैसे ही मेरे इस संशय
को काट दीजिये