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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

स्वविचारणयैवाशु शाम्यत्यन्तर्मनोज्वरः । शरदागममात्रेण मिहिका महती यथा ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

हे राजन्‌, जैसे शरत्‌-काल के आगमन मात्र से बड़े-बड़े मेघमण्डल विलीन हो जाते हैं, वैसे ही केवल अपनेपन का विचार करने से ही मन का भीतरी संताप शीघ्रातिशीघ्र विलीन हो जाता है