Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
तावत्तावन्महाबाहो स्वयं संत्यज्यतेऽखिलम् ।
यावद्यावत्परालोकः परमात्मैव शिष्यते ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
तब किन किन विषयो में या कितने समय तक वैराग्य करना चाहिए ? ऐसी शंका होने पर कहते हैं ।
हे महाबाहो, जब तक स्वयंज्योति परमात्मा का ही अवशेषरूप से अनुभव नहीं किया जाता जब
तक समस्त प्रपंच का स्वयं परित्याग करना चाहिए