Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
चेतोवासनया पङ्के कीटवत्परिमज्जसि ।
दृश्यमात्रावलम्बिन्या स्वया दीनतया तया ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
केवल दृश्य का अवलम्बन करनेवाली अन्तःकरण
की वासनारूपी उक्त अपनी दीनता से कीड़े की भाँति आप कीचड़ में फस रहे हैं