Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
यावदन्यन्न संत्यक्तं तावत्सामान्यमेव हि ।
वस्तु नासाद्यते साधो स्वात्मलाभे तु का कथा ॥ ४५ ॥
हिन्दी अर्थ
साधो, व्यवहार में भी जब तक विरोधी वस्तु को नहीं छोड़ते तब तक सामान्य गाय, धन
आदि वस्तु भी जब प्राप्त नहीं की जा सकती, तब असाधारण आत्मा के लाभ की तो कथा ही
क्या ?