Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
यो लतावृक्षगुल्मौघवापीहृदनदीनदैः ।
मृगैर्मृगगणैर्भूतैर्ब्रह्माण्डवदिवावृतः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
ओर भूतो का आधार है अथवा उन लता आदियों से वह समस्त ब्रह्माण्ड की तरह आच्छादित है