Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
सर्वाकारविकाराढ्या सर्वाकारविवर्जिता ।
सर्वभूतौघतां याता सर्वदा सर्वतां गता ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यह चिति शक्ति सम्पूर्ण आकार और विकारों से युक्त है, समस्त विकारों
से रहित है तथा सब भूतों के समूह की रूपता को प्राप्त हुई इस चितिशक्ति ने सदा सर्वभाव को प्राप्त
किया है