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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

चतुर्दशविधान्येषा भूतानि भुवनोदरे । एतन्मयीयं कलना जागती वेदनात्मिका ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

यही चिति शक्ति चौदह भुवनों के भेद से चौदह प्रकार के भूतों के संगो को उनके अन्दर धारण करती हे । अनुभवात्मक जगत्‌ की यह कल्पना भी इस चितिशक्ति को छोड़कर दूसरा कुछ भी नहीं हे