Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मिथ्यावभासमात्रं तु सुखदुःखदशागतिः ।
नानाकारमयाभासः सर्वमात्मैव चित्परा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
सुख और दुःख की अवस्था का जो परिज्ञान होता है, वह तो केवल मिथ्या अवभास है
और नाना प्रकार के आकारों से अवभासमान जो आत्मा है, वह सब कुछ परा चिति ही है