Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
सोऽयमात्मा मम व्यापी सेयं यदवबोधनम् ।
सेयमाकलिताङ्गाभा करोति नृपविभ्रमम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
यही
चिति समस्त जगत् में अनुगत मेरी आत्मा है, जो मेरी बुद्धि का साक्षी है, वह यही चिति है । वहाँ यह
चितिशक्ति द्रष्टा और दृश्य के भेद से काल्पनिक शरीरवाली होकर “मे राजा हूँ” ऐसा भ्रम पैदा करती
है यानी ज्ञानदशा के पहले उसी ने मैं राजा हूँ” यह भ्रम पैदा किया था, यह भाव है