Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
अस्या एव प्रसादेन मनो देहरथे स्थितम् ।
संसारजाललीलासु याति वल्गति नृत्यति ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीररूपी
रथ पर आरूढ हुआ मन इसी चितिशक्ति के प्रसाद से अनेक तरह के संसारों की लीलाओं में जाता है,
दौड़-धूप करता है और नृत्य करता है