Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
इदं मनःशरीरादि न किंचिदपि वस्तुतः ।
नष्टे न किंचिदप्यस्मिन्परिनश्यति पेलवे ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
वास्तव में ये मन, शरीर आदि वस्तुएँ कुछ भी नहीं हैं।
तुच्छ मन आदि के नष्ट हो जाने पर भी इस आत्मा का कुछ बिगड़ने नहीं पाता