Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
कष्टं मुधैव मे चिन्ता निग्रहानुग्रहस्थितौ ।
बभूव देहनिष्ठेह न किंचिदपि देहकम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त दुःख की बात है कि निग्रह और अनुग्रह की स्थिति में मुझे
देहविषयिणी चिन्ता व्यर्थ ही हुई, क्योकि यहाँ परमार्थ में यह कुछ भी नहीं है