Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
अहो नु संप्रबुद्धोऽस्मि सम्यग्ज्ञातमलं मया ।
नमो मह्यमनन्ताय सम्यग्ज्ञानोदयाय च ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
भाँति पूर्णरूप से मैंने जान लिया । सम्यक् ज्ञान होने पर जिसका आविभव होता है अथवा जो
सम्यक् -ज्ञानरूपी अभ्युदय है, उस अनन्त आत्मरूपतत्त्व को नमस्कार है