Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 6, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 6, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
केचिदात्मविदो धन्या विचारितमनोदृशः ।
विच्छिन्नतृष्णानिगडा यान्ति निष्केवलं पदम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
राजस-तामस और शुद्धतामस जीवो को कह कर शुद्धसात्विक जीवों को कहते है ।
कोई आत्मज्ञानी धन्य पुरुष, जिन्होंने मन के साक्षी आत्मा का विचार कर लिया ओर जिनकी
तृष्णारूपी बन्धन श्रृंखला टूट गयी हो, वे केवल्यरूप पद को प्राप्त होते हे