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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 60, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

ततःप्रभृति सोऽतिष्ठतसर्वदा विगतज्वरः । समासमे स्वके कार्ये जलौघाग्र इवाचलः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

तभी से लेकर वह राजा चिन्ता ज्वर से मुक्त होकर अपने राजोचित निग्रह ओर अनुग्रहरूपी कार्यो में वैसे अटल बना रहता था, जैसे प्रबल प्रवाह के सामने नदी के मध्य में रहनेवाला पर्वत अटल बना रहता हे