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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 60, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 60, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 60 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

हर्षामर्षविनिर्मुक्तः प्रत्यहं कार्यमाहरन् । उदारगम्भीरवपुर्जहाराम्बुनिधेः श्रियम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

हर्ष ओर विषाद रहित होकर प्रतिदिन अपने आय, व्यय आदि कार्यो को करते हुए उस उदार और गम्भीर आकृतिवाले राजा ने समुद्र की सुन्दरता चुरा ली यानी समुद्र की शोभा पर विजय पाई