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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । एवमुत्पलपत्राक्ष राघवाघविपर्यये । पदमासादयाद्वन्द्वं विशोको भव भूतये ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : कमल के समान नेत्रोंवाले हे राघव, राजा सुरघु के समान आप भी हर्ष, शोक आदि के निमित्त पापों का तत्त्वज्ञान से समूल उच्छेद होने पर द्वन्द्ररहित परम पद को प्राप्त कीजिये ओर उत्तम मोक्षरूपी विभूति के लिए शोक का परित्याग कर दीजिये

सर्ग सन्दर्भ

साठवाँ सर्ग समाप्त डुकसठवाँ सर्ग अद्वितीय पर ब्रह्म में स्वाभाविक चित्तैकाग्रयात्मक समाधि के स्वरूप के ज्ञान के लिए सुरघु और परिघ के संवाद का वर्णन ।