Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

अकृत्रिमसुखं प्रेम वियोगे शतशाखताम् । प्रयाति पल्वलतटेऽच्छिन्नमूल इव द्रुमः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

तालाब के किनारे पर अवस्थित छिन्न आशावाले वृक्ष के समान सहज आनन्द का समर्पण करनेवाला स्वाभाविकं प्रेमवियोगावस्था में सैकड़ों शाखा-प्रशाखाओं को प्राप्त होता हे