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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

विश्रब्धास्तान्कथालापांस्ता लीलास्तच्च चेष्टितम् । संस्मृत्य प्राक्तनं साधो हृष्यामि च पुनःपुनः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

साधो, विश्वास गर्भित उन पहले की सुखदुःख की कथाओं, लीलाओं तथा व्यापारो का बार-बार स्मरण कर मैं आनन्द से परिपूर्ण हो जाता हूँ