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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 34

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 34

संस्कृत श्लोक

कच्चित्तव दिगन्तेषु चन्द्रस्येवाशुपञ्जरम् । तुषारनिकराकारं प्रसृतं पावनं यशः ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

राजन्‌, चन्द्रमा की अनेक किरणों की नाई समस्त दिशाओं में तुषार के समूह के सदुश आपका क्या पवित्र यश फैला है ?