Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
कच्चिद्रुणगणैरेता दिशो निर्विवरीकृताः ।
त्वया सरोम्भसाऽबाह्या विसानामिव भूमयः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
महात्मन्, जैसे तालाब का जल अपने अन्दर रहने वाली कमल के नाल की भूमि को
भर देता हे, वैसे ही क्या आपने-अपने प्रशस्त गुण-गणों से दिशाएँ भर दी हैं ?