Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verses 36–37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verses 36–37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 36,37
संस्कृत श्लोक
कच्चित्कलमकेदारकोणस्थानेषु दृष्यतीः ।
प्रतिग्रामं कुमार्यस्ते गायन्त्यानन्दनं यशः ॥ ३६ ॥
कुशलं तव धान्येषु धनेषु विभवेषु च ।
भृत्येषु च कलत्रेषु पुत्रेषु नगरेषु च ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
क्या धान की
क्यारियों के कोने में अवस्थित अतिप्रसन्न कुमारियाँ प्रत्येक गाँव में आपके आनन्दवर्धक यशोगान कर
रहीं हैं ? धान््य, धन, विभव, सेवक, स्त्रीजन, पुत्र, परिवार और नगरादि सर्वत्र स्थानो में कुशल तो है
न ?