Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
न ता जगति विद्यन्ते सुखदुःखदशाः सखे ।
जीवद्भिर्या न दृश्यन्ते संयोगजवियोगजाः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रियवर, इस जगदीतल में इष्ट ओर अनिष्ट जनों के संयोग एवं वियोग से
होने वाली वे सुख और दुःख की अवस्थाएँ हैं ही नहीं, जो देहधारी प्राणियों के द्वारा अनुभूत न होती
हैं