Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
तथैतास्वतिदीर्घासु दशास्वन्यत्वमागताः ।
भूयो वयमपि श्लिष्टाश्चित्रो हि नियतेर्विधिः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
वियोगी थे, परन्तु फिर भी इस समय हम लोग एक दूसरे से मिल गये हैं, क्योकि प्राणियों के कर्मो के
अनुसार होनेवाली भगवदिच्छा का विलास अद्भुत है यानी कुछ ओर ही हे