Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 61, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 61, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 61 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । श्रृणु तस्यैव सुरघोः प्रबुद्धस्य सतस्तदा । पर्णादस्य च राजर्षेः संवादमिममद्भुतम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र, जिस समय सुरघु आत्मसाक्षात्कार कर लेने के अनन्तर प्रबुद्ध हो चुके थे, उसी समय उसी तत्त्वज्ञ सुरघु राजा ओर राजर्षि पर्णाद का (इसीका "परिघ" यह दूसरा भी नाम हे) परस्पर इस विषय में अत्यन्त अद्भुत संवाद हुआ था, इसका आप श्रवण कीजिये