Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 62, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
नहि प्रबुद्धमनसो भूत्वा विच्छिद्यते पुनः ।
समाधिर्दूरमाकृष्टो बिसतन्तुः शिशोरिव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे क्रीडा कर रहे बालक के हाथ से दूर खींचा गया कमल का तन्तु टूट जाता है, वैसे प्रबुद्ध
अन्तःकरणवाले ज्ञानी की समाधि लगकर पुनः टूट नहीं जाती, यहाँ व्यतिरेकी दृष्टान्त है