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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 62, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

सर्वगः सर्वदैवात्मा सर्वमेव च सर्वथा । असमाधिर्हि कोऽसौ स्यात्समाधिरपि कः स्मृतः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

चूँकि यह जो कुछ दिखलाई पड़ता है, वह सभी कुछ सदा सब प्रकार सर्वव्यापक आत्मस्वरूप ही है, इसलिए यह समाधि क्या होगी और असमाधि भी क्या कही जायेगी ? अर्थात्‌ उन दोनों के स्वरूप के विषय में कुछ भी नहीं कहा जा सकता