Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 62, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 62, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
कच्चित्संकल्परहितं परं विश्रमणास्पदम् ।
परमोपशमं श्रेयः समाधिमनुतिष्ठसि ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह अपने अनुभव का प्रकाशन कर वह युक्त है या अयुक्त इस विषय में दूसरे के अनुभव की
जिज्ञासा कर रहे राजा परिघ मानों समाधि में ही अधिक विश्रान्ति है, यों दिखलाते हुए प्रश्न करते है।
हे राजन्, समग्र संकल्पो से शून्य, विश्रान्ति के सबसे उत्तम स्थानरूप, विक्षेपात्मक दुःखो के
उपशम में परम साधन तथा सांसारिक सुखो की अपेक्षा अधिक प्रशस्त समाधि का क्या आप अनुष्ठान
करते हैं ?