Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
वाञ्छायां विनिवृत्तायां संक्षयो द्वेषरागयोः ।
दिनलक्ष्म्यां व्यपेतायामालोकातपयोरिव ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
राजन्, जैसे दिवस-
शोभा का विनाश हो जानेपर तदनुगामी प्रकाश और ताप दोनों का विनाश हो जाता है, वैसे ही इच्छा
का विनाश हो जानेपर तदनुगामी राग ओर द्वेष दोनों का विनाश हो जाता है यानी राग-द्वेषमूलक
प्रवृत्ति ओर निवृत्ति का निरास हो जाता है