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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

निर्मलो विततः पूर्णो गम्भीरः प्रकटाशयः । वेलानिलविलासेन मुक्तोऽब्धिरिव राजसे ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे तट के झंझावात के झकोरो से निर्मुक्त तथा निर्मलत्व आदि गुणों से युक्त विस्तृत समुद्र सुशोभित होता है, वैसे ही निर्मल अतएव विस्पष्टरूप से दिखाई देनेवाले आशय से, अन्तःकरण से (समुद्र-पक्ष में अन्तःप्रदेश से) युक्त, गम्भीर, पूर्ण, व्यापक स्वरूप तथा संसाररूपी वायु के झकोरों से निर्मुक्त आप सुशोभित हो रहे हैं