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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

स्वच्छ आनन्दसंपूर्णो नष्टाहंकारवारिदः । स्फुटो विस्तीर्णगम्भीरः शरत्खमिव राजसे ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

आकाश