Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
चिरं शोचन्ति ते दीना जन्मजङ्गलवीरुधः ।
आत्मावलोकने हेला येषामविगतैनसाम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
पाप के
विनाश से वर्जित अतएव जिन मनुष्यों की आत्मा को जानने में उपेक्षा हें वे जन्मरूपी जंगल के पौधे हैं,
दीन हैं और चिरकाल तक संसार दुःखों से दुःखित होकर शोक किया करते हैं