Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तानि मित्राणि शास्त्राणि तानि तानि दिनानि च ।
विरागोल्लासवान्येभ्य आत्मचित्तोदयः स्फुटम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
वे ही मित्र मित्र है, वे ही शास्त्र शास्त्र हैं और वे ही दिन दिन हैं, जिनके कारण वैराग्यरूपी
उल्लास से युक्त आत्माकार वृत्तिरूपी चित्त का अभ्युदय विस्पष्ट रीति से सिद्ध होता है