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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 45

संस्कृत श्लोक

अहंकाराम्बुदे क्षीणे दृश्यते चिद्दिवाकरः । ततस्तत्परिणामेन तत्पदं समवाप्यते ॥ ४५ ॥

हिन्दी अर्थ

अहंकाररूपी मेघ के विनष्ट हो जाने पर पहले चैतन्यरूपी सूर्य दिखाई देता है, तदनन्तर उस परमात्मदर्शन की भूमिका का परिपाक हो जाता है और उससे परमपद प्राप्त हो जाता है