Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
यथा ध्वान्तसमुच्छेदे स्वयमालोकवेदनम् ।
तथाहंकारविच्छेदे स्वयमात्मावलोकनम् ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे अन्धकार का उच्छेद हो जाने पर प्रकाश का परिज्ञान स्वतः हो जाता है, वैसे ही
अहंकार का विच्छेद हो जाने पर आत्मा का परिज्ञान स्वत: हो जाता है