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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

अहंकारे परिक्षीणे यावस्था सुखमोदजा । सावस्था भरिताकारा सा सेव्या संप्रयत्नतः ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

अहंकार के विनष्ट हो जाने पर जो निरतिशयानन्द विश्रान्ति की स्वरूपभूत निर्विकल्प अवस्था आविर्भूत होती है, वह परिपूर्ण अवस्था है, उसीका उत्तम प्रयत्न से सेवन करना चाहिए