Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
अनुभूतिं विना तत्त्वं खण्डादेर्नानुभूयते ।
अनुभूतिं विना रूपं नात्मनश्चानुभूयते ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे साधारण खांड आदि के स्वरूप का अपने अनुभव के सिवा ओर किसी
दूसरे प्रमाण से परिज्ञान नहीं होता, वैसे ही आत्मा के स्वरूप का भी अपने अनुभव के सिवा ओर किसी
दूसरे प्रमाण से परिज्ञान नहीं होता