Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 65, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
तयोरथैकास्पदयोस्तथाभूतां सुतावुभौ ।
फुल्लाङ्कुरौ शुद्धतनू सरस्यम्बुजयोरिव ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
किसी
समय की बात है वहाँ पर एक ही आश्रम में रहनेवाले उन दोनों तपस्तियों के विशुद्ध स्वरूपवाले दो पुत्र
ऐसे उत्पन्न हुए जैसे कि तालाब में दो कमलों के पौधों में फूलों की प्रकृति कलियाँ उत्पन्न होती
हैं