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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 65, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

पञ्चत्वं गतयोः पित्रोर्दीनवक्त्रौ बभूवतुः । तप्ताङ्गौ विगतोत्साहौ पद्माविव जलोद्धृतौ ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

पिताओं के मर जाने पर पानी से निकाले गये कमल की भाँति वे दोनों चेहरे से दीन, शरीर से सन्तप्त और उत्साह से रहित हो गये