Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 65, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
जग्मतुर्देहमुत्सृज्य ततस्तौ पितरौ तयोः ।
स्वर्गं जरार्तावुड्डीय नीडादिव विहंगमौ ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जैसे अपने खोते से उड़कर दो पक्षी
अन्यत्र चले जाय, वैसे ही वृद्धावस्था से पीड़ित उन दोनों के वे दोनों पिता (शुक्र और बृहस्पति) शरीर
को छोड़ परलोक चले गये