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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 65, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

प्रापतुर्यौवनं बाल्यमुत्सृज्य नववल्लभौ । कालेनाल्पतरेणैव चन्द्रसूर्याविवोदितौ ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

अल्पकाल मे ही बाल्यावस्था का अतिक्रमण कर नवीन प्रिय उन दोनों ने उदय को प्राप्त सूर्य और चन्द्रमा के समान युवावस्था प्राप्त की