Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 65, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 65, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 65 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
तौ तथान्योन्यमुदितौ मनोहरतराकृती ।
तस्थतुः स्वाश्रमे मौने सरोज इव षट्पदौ ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त मनोहर शरीरवाले वे दोनों बालक कमल में दो भँवरों की नाईं एक दूसरे से
मुदित होकर मुनियों से विराजित उसका सुन्दर आश्रम में उसी प्रकार प्रेमयुक्त होकर निवास करते
थे