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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

कायजीर्णतरोरस्माद्बान्धवाक्रन्दषट्पदा । जराकुसुमितोदेति पुनर्मरणमञ्जरी ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

इस शरीररूपी जीर्ण शीर्ण वृक्ष से मरणरूपी मंजरी (बौर), जिस पर बान्धवों के आक्रन्दनरूपी भँवरों के गुंजार शब्द होते रहते हैं और वृद्धावस्थारूप पुष्प लगते हैं, बार-बार उत्पन्न होती रहती है